Thursday, February 7, 2019

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के दिन रिज़वी का ट्वीट

आसिया की गिरफ्तारी के नौ साल बाद आख़िरकार बीते साल वो 31 अक्टूबर का दिन आ ही गया, जब आशिक की दुआएं कबूल हुईं.
हज़ारों कट्टर मुसलमानों की उम्मीदों के उलट, पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सबूत के अभाव में पहले दी गई सजा को रद्द करते हुए आसिया बीबी को रिहा करने का आदेश दिया था.
आदेश के कुछ ही घंटों के अंदर सड़कों पर लोग इसके विरोध में उतर आए. ये सब लोग एक ही मांग कर रहे थे, "आसिया बीबी को मौत की सज़ा दो.आसिया बीबी को मौत की सज़ा दो."
लगातार तीन दिनों तक विरोध प्रदर्शन करने वालों ने सरकार से अपनी बात मनवाने के लिए हर संभव दबाव डाला. मुख्य सड़कों को बंद कर दिया गया, कारों और बसों को जला दिया गया, टोल बूथों पर तोड़-फोड़ की गई.
इतना ही नहीं, पुलिस अधिकारियों पर भी हमले हुए. ख़ासकर पूर्वी पंजाब में, जहां हिंसा की घटनाओं को देखते हुए को देखते हुए दफ़्तर,बाज़ार और स्कूलों को बंद करना पड़ा क्योंकि सड़क पर चलना संभव नहीं रह गया था.
इस दौरान पूरे देश में डर और आतंक का माहौल था जबकि सरकार कहीं दिखाई नहीं दे रही थी.
इसके बाद पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने देश को टेलीविजन के ज़रिए संबोधित किया. उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे लोग सरकार से टकराव का रास्ता नहीं चुनें.
तीन दिनों तक चली उथल-पुथल के बाद सरकार ने कहा कि वो किसी भी ख़ून ख़राबे को रोकने के लिए विद्रोह पर उतारू लोगों से बातचीत करेगी.
आसिया बीबी की रिहाई के तुरंत बाद ख़ादिम हुसैन रिज़वी और उनकी धार्मिक रुझान वाली राजनीतिक पार्टी तहरीक-ए-लबैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने सोशम मीडिया के सहारे सामाजिक अव्यवस्था और हिंसा को बढ़ावा दिया था.
इन लोगों ने आसिया को रिहा करने वाले जजों की हत्या तक का फतवा जारी कर दिया, सेना में विद्रोह के लिए सैनिकों को प्रोत्साहित किया गया, इसके लिए सेना प्रमुख के बारे में ये भी प्रचारित किया गया है कि उन्होंने विश्वासघात करते हुए इस्लाम को त्याग दिया है.
जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया, व्हीलचेयर पर चलने वाले 53 साल के मौलवी रिज़वी ने ट्वीट किया, "आसिया की रिहाई इंसाफ से मरहूम करने जैसा है."
इसकी आड़ में उन्होंने घृणा फैलाने वाला अपना भाषण भी दिया.
रिजवी ने ये भी आरोप लगाया कि पश्चिमी देश इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ ईशनिंदा को बढ़ावा दे रहे हैं. अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि लोग जानबूझकर ईशनिंदा करते हैं ताकि उन्हें पश्चिमी देशों से पैसा और संरक्षण मिल सके.

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