लिस का कहना है कि फ्रांस की राजधानी
पेरिस में एक व्यक्ति ने चाक़ू से हमला करके सात लोगों को घायल कर दिया है.
इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है.
घटना के वक्त लोग एक नहर के किनारे खेल रहे थे, जिन्होंने हमलावर को रोकने की कोशिश भी की थी.
हमले के सिलसिले में जिस व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, कहा जा रहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान का है. इस घटना को फ़िलहाल चरमपंथी हमला नहीं माना जा रहा है.
एक प्रत्यक्षदर्शी युसूफ़ नजाह का कहना है कि जब वो नहर के किनारे टहल रहे थे, उन्होंने एक व्यक्ति को दौड़ते देखा जिसके हाथ में लगभग 25-30 सेंटीमीटर लंबा चाक़ू था.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लगभग 20 लोग हमलावर का पीछा कर रहे थे.
लेकिन पुलिस के एंटी क्राइम दस्ते ने हमलावर को दबोच लिया. ब्रिटेन के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इस घटना की बारीकी से जांच की जा रही है.
फ्रांस में चाक़ू से हमले की पिछले कुछ महीनों में कई घटनाएं हुई हैं. इनमें से कुछ ही घटनाओं की चरमपंथी हमले के नज़रिए से जांच की गई है.
कई विश्लेषकों ने पहले ही ये अनुमान लगाया था कि जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद किम जोंग-उन परेड की आक्रामकता थोड़ी कम करेंगे.
ऐसे में बैलिस्टिक मिसाइलों का, ख़ासकर उन बैलिस्टिक मिसाइलों का जो अमरीकी सरज़मीं तक पहुंचने की क्षमता रखतीं हों और जिनमें परमाणु युद्ध छेड़ने का दमख़म हो, उनका प्रदर्शन करना अपने-आप में काफ़ी उकसावे वाला होता.
इस परेड का कोई फ़ुटेज उत्तर कोरिया की ओर से अभी जारी नहीं किया गया है. हालांकि समाचार एजेंसी एफ़पी के एक संवाददाता मौके पर उपस्थित थे.
इसके अलावा एनके न्यूज़ ने उत्तर कोरिया के सरकारी टीवी चैनल से मिली एक तस्वीर शेयर की है और कहा है कि परेड में कोई आईसीबीएम नहीं देखी गई.
जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग-उन ने कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु नि:शस्त्रीकरण पर काम करने की बात की थी. हालांकि इस बारे में कोई डेडलाइन या डिटेल नहीं मिली थी.
ख़ास बात ये है कि इस बार पूरी दुनिया उत्तर कोरिया की इस परेड की झलकियां देख सकेगी. क्योंकि उत्तर कोरिया ने आयोजन में इस बार विदेशी मीडिया को भी आमंत्रित किया है.
इससे पहले तक इस परेड की कोई मीडिया कवरेज़ नहीं होती थी.
लेकिन विदेशी मीडिया को भी कुछ चुनिंदा चीज़ें शूट करने की ही इजाज़त होगी. इससे दुनिया उत्तर कोरिया का अनुशासन और निष्ठा तो देखेगी, लेकिन वो इस परेड के पीछे के दर्द को नहीं देख पाएगी.
यानी विदेशी मीडिया ये नहीं जान पाएगी कि इस 10 मिनट की परेड के लिए उत्तर कोरिया के लोगों को कितनी कड़ी ट्रेनिंग से गुज़रना पड़ा है.
उत्तर कोरिया की स्वाधीनता की मांग करने वाली अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था के सोकील पार्क कहते हैं, "दुनिया उत्तर कोरिया के लोगों को देख सकेगी, लेकिन उन्हें सुन नहीं सकेगी. अगर उन्हें बोलने का मौका मिले तो शायद परेड में शामिल हर चेहरे का एक अलग मत होगा."साल के किम जी-योंग छह साल पहले उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया आ गए थे. वो विश्वविद्यालय के छात्र थे. उन्होंने उत्तर कोरिया में रहते हुए एक मार्च में हिस्सा लिया था. उस मार्च में सबने मशाले थाम रखी थीं. ये मार्च उस वक्त की याद में निकाली गई थी जब उत्तर कोरिया के पहले नेता किम II-सुंग ने जापानी शासन से देश को आज़ादी दिलाने के लिए रातों में युद्ध लड़ा था.
"इस मार्च में शामिल लोग इस तरह चल रहे थे कि ऊपर से देखने पर कुछ अक्षर के आकार का नज़र आता था. मशालों से जलते ये अक्षर ऊपर से देखने में तो बहुत शानदार लग रहे थे, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए युवा छात्रों को बहुत ध्यान से एक लय में चलना पड़ रहा था. इस दौरान कई बार हमारी कमीज़ में आग लग गई."
किम जी-योंग बताते हैं, "इस मार्च के लिए हमने छह महीने तक कड़ी रिहर्सल की थी. इतनी कड़ी मेहनत सिर्फ़ मशाल लेकर चलने के लिए कराई गई थी. मार्च का नेतृत्व कर रहा शख़्स ज़ोर से कहता - 'हुर्रे महान नेता किम II-सुंग!' हम सबको जवाब में 'हुर्रे, हुर्रे, हुर्रे' कहना होता था."
घटना के वक्त लोग एक नहर के किनारे खेल रहे थे, जिन्होंने हमलावर को रोकने की कोशिश भी की थी.
हमले के सिलसिले में जिस व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, कहा जा रहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान का है. इस घटना को फ़िलहाल चरमपंथी हमला नहीं माना जा रहा है.
एक प्रत्यक्षदर्शी युसूफ़ नजाह का कहना है कि जब वो नहर के किनारे टहल रहे थे, उन्होंने एक व्यक्ति को दौड़ते देखा जिसके हाथ में लगभग 25-30 सेंटीमीटर लंबा चाक़ू था.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लगभग 20 लोग हमलावर का पीछा कर रहे थे.
लेकिन पुलिस के एंटी क्राइम दस्ते ने हमलावर को दबोच लिया. ब्रिटेन के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इस घटना की बारीकी से जांच की जा रही है.
फ्रांस में चाक़ू से हमले की पिछले कुछ महीनों में कई घटनाएं हुई हैं. इनमें से कुछ ही घटनाओं की चरमपंथी हमले के नज़रिए से जांच की गई है.
उत्तर कोरिया का 70वां स्थापना दिवस
रविवार को मनाया गया. पिछले छह महीने से इसकी तैयारियां चल रही थीं और पूरी
दुनिया को इसका इंतज़ार था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर कोरिया ने इस बार मिलिट्री परेड में किसी इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन नहीं किया.कई विश्लेषकों ने पहले ही ये अनुमान लगाया था कि जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद किम जोंग-उन परेड की आक्रामकता थोड़ी कम करेंगे.
ऐसे में बैलिस्टिक मिसाइलों का, ख़ासकर उन बैलिस्टिक मिसाइलों का जो अमरीकी सरज़मीं तक पहुंचने की क्षमता रखतीं हों और जिनमें परमाणु युद्ध छेड़ने का दमख़म हो, उनका प्रदर्शन करना अपने-आप में काफ़ी उकसावे वाला होता.
इस परेड का कोई फ़ुटेज उत्तर कोरिया की ओर से अभी जारी नहीं किया गया है. हालांकि समाचार एजेंसी एफ़पी के एक संवाददाता मौके पर उपस्थित थे.
इसके अलावा एनके न्यूज़ ने उत्तर कोरिया के सरकारी टीवी चैनल से मिली एक तस्वीर शेयर की है और कहा है कि परेड में कोई आईसीबीएम नहीं देखी गई.
जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग-उन ने कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु नि:शस्त्रीकरण पर काम करने की बात की थी. हालांकि इस बारे में कोई डेडलाइन या डिटेल नहीं मिली थी.
उत्तर कोरिया के 70वें स्थापना दिवस
के मौके पर हर साल की तरह इस साल भी देश में भव्य परेड का आयोजन किया
जाएगा. रविवार को होने वाली इस परेड में उत्तर कोरिया के लाखों नागरिक
मार्च करते नज़र आएंगे.
ये मर्च सिर्फ़ 10 मिनट की होगी लेकिन इसकी
रिहर्सल पिछले 6 महीने से की जा रही है. इस परेड में उत्तर कोरिया की सैन्य
ताक़त का भी प्रदर्शन किया जाएगा.ख़ास बात ये है कि इस बार पूरी दुनिया उत्तर कोरिया की इस परेड की झलकियां देख सकेगी. क्योंकि उत्तर कोरिया ने आयोजन में इस बार विदेशी मीडिया को भी आमंत्रित किया है.
इससे पहले तक इस परेड की कोई मीडिया कवरेज़ नहीं होती थी.
लेकिन विदेशी मीडिया को भी कुछ चुनिंदा चीज़ें शूट करने की ही इजाज़त होगी. इससे दुनिया उत्तर कोरिया का अनुशासन और निष्ठा तो देखेगी, लेकिन वो इस परेड के पीछे के दर्द को नहीं देख पाएगी.
यानी विदेशी मीडिया ये नहीं जान पाएगी कि इस 10 मिनट की परेड के लिए उत्तर कोरिया के लोगों को कितनी कड़ी ट्रेनिंग से गुज़रना पड़ा है.
उत्तर कोरिया की स्वाधीनता की मांग करने वाली अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था के सोकील पार्क कहते हैं, "दुनिया उत्तर कोरिया के लोगों को देख सकेगी, लेकिन उन्हें सुन नहीं सकेगी. अगर उन्हें बोलने का मौका मिले तो शायद परेड में शामिल हर चेहरे का एक अलग मत होगा."साल के किम जी-योंग छह साल पहले उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया आ गए थे. वो विश्वविद्यालय के छात्र थे. उन्होंने उत्तर कोरिया में रहते हुए एक मार्च में हिस्सा लिया था. उस मार्च में सबने मशाले थाम रखी थीं. ये मार्च उस वक्त की याद में निकाली गई थी जब उत्तर कोरिया के पहले नेता किम II-सुंग ने जापानी शासन से देश को आज़ादी दिलाने के लिए रातों में युद्ध लड़ा था.
"इस मार्च में शामिल लोग इस तरह चल रहे थे कि ऊपर से देखने पर कुछ अक्षर के आकार का नज़र आता था. मशालों से जलते ये अक्षर ऊपर से देखने में तो बहुत शानदार लग रहे थे, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए युवा छात्रों को बहुत ध्यान से एक लय में चलना पड़ रहा था. इस दौरान कई बार हमारी कमीज़ में आग लग गई."
किम जी-योंग बताते हैं, "इस मार्च के लिए हमने छह महीने तक कड़ी रिहर्सल की थी. इतनी कड़ी मेहनत सिर्फ़ मशाल लेकर चलने के लिए कराई गई थी. मार्च का नेतृत्व कर रहा शख़्स ज़ोर से कहता - 'हुर्रे महान नेता किम II-सुंग!' हम सबको जवाब में 'हुर्रे, हुर्रे, हुर्रे' कहना होता था."
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