Friday, September 28, 2018

व्यवस्थित करियर है वास्तुकला

सपना चाहे घर बनाने का ही क्यों न हो , साकार होने में कई कवायदों से गुजरता है। संसार में हम जो महत्त्वपूर्ण इमारतें देखते हैं, वे केवल मात्र ईंट, रेत, बजरी और सीमेंट ही नहीं हैं बल्कि इन के निर्माण के लिए योजना बनी, डिजाइन बनी और उसके बाद हर चीज को ध्यान में रखते हुए इनका निर्माण हुआ…कल्पनाओं से साकार नहीं होते, इन्हें जमीन पर उतारने के लिए मेहनत और लगन की जरूरत होती है। आज जो हम ताजमहल देखते हैं, वह कभी किसी की कल्पना ही तो था और इस कल्पना को कलेवर दिया किसी वास्तुविद ने। वास्तुकला ने ताजमहल जैसे कई हसीन सपनों को साकार किया है। समय पंख लगा कर उड़ रहा है और साथ में उड़ रहे हैं मनुष्य के सपने।

सपना चाहे घर बनाने का ही क्यों न हो,  साकार होने में कई कवायदों से गुजरता है। संसार में हम जो महत्त्वपूर्ण इमारतें देखते हैं, वे केवल मात्र ईंट, रेत, बजरी और सीमेंट ही नहीं है बल्कि इन के निर्माण के लिए योजना बनी, डिजाइन बनी और उसके बाद हर चीज को ध्यान में रखते हुए इनका निर्माण हुआ। विश्व की मशहूर इमारतों में ताजमहल, पीसा की झुकी मीनार, अक्षरधाम मंदिर आदि निर्माण की अद्भुत मिसालें हैं। वास्तुकला भी इसी कवायद का एक हिस्सा है। वास्तुकला किसी स्थान को मनुष्य के लिए रहने योग्य बनाने की कला है। और इस कला के जानकार को कहते हैं आर्किटेक्ट या वास्तुविद। निर्माण का कार्यक्षेत्र बढ़ने के कारण आर्किटेक्चर की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। आधुनिकता ने इस व्यवसाय को पंख लगाए हैं।
कोर्स कौन-कौन से
द्य आर्किटेक्चरल डिजाइनिंग में  बैचलर ऑफ  आर्किटेक्चर बीआर्क
द्य मास्टर ऑफ  आर्किटेक्चर एमआर्क
द्य सिविल इंजीनियरिंग में  बीई या बीटेक डिग्री
द्य पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर छात्र चाहें तो एमई या एमटेक कर सकते हैं
प्रमुख शिक्षण संस्थान
* एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी,  शिमला हिमाचल प्रदेश
* स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटक्चर, नई दिल्ली
* सेंटर फॉर एन्वायरमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी, अहमदनगर
* बंगाल इंजीनियरिंग एंड साइंस यूनिवर्सिटी, हावड़ा, पश्चिम बंगाल
* सर जेजे कॉलेज ऑफ  आर्किटक्चर, मुंबई,महाराष्ट्र
* सुशांत स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटक्चर,गुड़गांव
* कॉलेज ऑफ  इंजीनियरिंग, ऊधमपुर जम्मू-कश्मीर
आरंभिक आय
आय के बारे में इस क्षेत्र में कोई सीमा नहीं है। सरकारी क्षेत्र में कार्य करने वाले को आरंभ में 20 से 25 हजार तक वेतन मिलता है। प्राइवेट सेक्टर में यह कंपनी के ऊपर निर्भर करता है कि वह कितना पैकेज देती है। और अध्यापन के क्षेत्र में सैलरी काफी अच्छी है। अगर आप अपना व्यवसाय करते हैं तो यह आपके ऊपर है कि आप इस व्यवसाय में कितने स्थापित हैं।
वास्तुकला का इतिहास
वास्तुकला का आरंभ तो आदिकाल से ही हो चुका था। आदि मानव भी अपने रहने की जगह को रहने लायक बनाने का भरसक प्रयत्न करते थे। और किसी आवास को रहने लायक बनाना ही वास्तुकला है। बाद में यह कला चाहे कितनी भी जटिल हो गई हो, इसका आरंभ मौसम की उग्रता, वन्य पशुओं के भय और शत्रुओं के आक्रमण से बचने के लिए हुआ। मानव सभ्यता के इतिहास का भी ऐसा ही कुछ आरंभ है। इसलिए विद्वानों ने इसे मानव सभ्यता का योजक मसाला कहा। पहले इमारतें झोपड़ी और आश्रमों के रूप में होती थीं। इन्हें हाथों या साधारण उपकरणों से बनाया जाता था। जब शहरों ने कांस्य युग में प्रवेश किया, तो ईंट बिछाने और बढ़ई जैसे पेशेवर कारीगरों के एक वर्ग का उदय हुआ। आठवीं शताब्दी के बाद और विशेषकर 10वीं और 12वीं शताब्दी के बीच का काल मंदिर निर्माण कला का चरमोत्कर्ष माना जाता है। आज हम जिन भव्य मंदिरों को देखते हैं, अधिकतर इसी काल में बनाए गए हैं।
अवसर कहां हैं
आर्किटेक्ट्स के लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। सरकारी क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, स्वास्थ्य विभाग में आर्किटेक्ट की काफी मांग रहती है। इंजीनियरिंग कालेज और आर्किटेक्चरल कालेज में अध्यापन का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। यह भी देखा गया है कि सरकारी के बजाय प्राइवेट सेक्टर में इस क्षेत्र में करियर की अधिक संभावनाएं हैं।

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